Dr. Sudha Chauhan ‘Raj’ 3 Books Combo Set

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Description

Mahoba Ke Rajvansh / MRP: 200 / Pages: 106

 

Madhyakaleen Mahoba / MRP: 250 / Pages: 194

 

Alha / MRP: 250 / Pages: 214

Description: आल्हा और महोबा पर लिखी मेरी पिछली तीनों पुस्तक आप सभी को पसंद आयीं और उस पर दो बच्चे पी. एच. डी. भी कर रहे हैं। आप सभी के अनुरोध पर मैं आल्हा-उदल पर यह चौथी पुस्तक आल्हाखंड लोक महाकाव्य लिख रही हूं, यह आल्हा छंद में लिखा गया है। इसे आप आसानी से गाकर पढ़ सकते हैं। अब बाजार में आल्हा गायन की छोटी पुस्तकें दो या तीन लड़ाईयां उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए आप सभी की सुविधा के लिए इसे लिखा गया है। वैसे आल्हा तो जन मानस में आरम्भ से ही प्रचलित रहा है और रहेगा भी। इसे अक्सर बरसात में पढ़ा जाता है। आल्हा अभी भी गांवों में, कस्बों में और कई शहरों में आज भी प्रचलित है। बरसात में इसे अधिकांशतया गाया और सुना जाता है। गांवों में आज भी चौपाल पर आल्हा की स्वर लहरी गूंजती है। यह वीरों की वह दास्तां है, जो अमर जवान ज्योति की तरह हमेशा प्रज्जवलित रहेगी।

Book Details

Weight 514 g
Pages

514

Author

Dr. Sudha Chauhan 'Raj'

Binding

Language

Hindi