Samayant Rahasy Series (Triology)

1- यह कल्पितमाला विज्ञान, धर्म, पौराणिक संदर्भों तथा हिन्दू सभ्यता के रहस्यों के मोतियों को एक साथ पिरोकर लिखी गयी है। कथानक का मुख्य पात्र कल्कि, मानव-जाति को दिया गया ईश्वर का वह आशीर्वाद है जो दूसरे ग्रह के उर्ग्य प्रजाति द्वारा पृथ्वी पर किए गए अब तक के सबसे भयानक, विध्वंसक व विनाशकारी आक्रमण के खिलाफ लड़ रहा है । अपनी अंतिम साँसों को गिनती हुई घायल पृथ्वी तथा मानवजाति को बचाने के उद्देश्य में, कल्कि रोमांच-रहस्यों से भरी, मस्तिष्क को झकझोर देने वाली एक ऐसी रहस्यमय यात्रा पर चल पड़ता है जहाँ मृत्यु से भरे हुए पहेलीनुमा पथ के प्रत्येक पग पर अनिश्चितता छुपी हुई है। अपनी इस यात्रा में वह पृथ्वी पर उपस्थित सबसे करिश्माई व्यक्तियों से मिलता है, अनजान व विचित्र स्थानों पर जाता है तथा विचारों से भी परेय रहस्यों को सुलझाता है। रहस्य-रोमांच से भरी यह अभूतपूर्व गाथा पाठक के रोमांच व जिज्ञासा को एक पल के लिए भी चैन की साँस नहीं लेने देगी।.

2- हाथों पर आड़ी तिरछी रेखाएँ तो विधाता ने सबके ही हाथों में खींची हैं लेकिन उनको इच्छानुसार बदलने वाली तकदीरें लेकर सिर्फ कुछ ही लोग पैदा होते हैं। ऐसा ही महामानव है– कल्कि, जो तकदीर को भी बदलने की क्षमता रखता है। आयामों की भूलभुलैया, समय चक्र में विकृति, सुसुप्तावस्था से जाग्रत विचित्र नरभक्षी जीव तथा अधमृत जानवरों के झुण्ड को झेलते हुए कल्कि की रोमांच, रहस्यों व अनिश्चितताओं से परिपूर्ण यह गाथा आपको एक ऐसे रोलर कोस्टर रुपी ख्यालों के बवंडर में ले जाएगी जो आँखों के सामने साक्षात् नरक प्रकट कर देगी। क्या कल्कि भारतीय सभ्यता के महान सप्त चिरञ्जीव की सहायता से इस भीषण संकट का सामना कर पायेगा? आयामों के दरमियान फँसी परम कुंजी को खोज पायेगा? रहस्यमयी नगरी ज्ञानाश्रम, पवित्र कैलाश पर्वत व विध्वंसकारी ब्रह्मास्त्र के सत्य से पर्दा उठा पायेगा? क्या होगा जब साढ़े तीन हजार वर्षों के बाद अश्वत्थामा फिर से युद्ध के मैदान में उतरेगा? इन प्रश्नों के अकल्पनीय व अविश्वसनीय उत्तर निश्चित ही आपकी न्यूरोलॉजिकल दिलचस्पी को उच्चतम स्तर पर ले जायेंगे।