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फेयरनेस क्रीम (कहानी – प्रियंका ओम) अंक-1


प्रियंका ओम

नाम कॉमन हो सकता है, पर कहानियाँ नहीं। सच लिखती है, बेहिचक लिखती है, बिंदास लिखती है। इनकी कहानियों में समाज का कड़ुवा सच है, तो जिंदगी की फंतासियां भी। रिश्तों की नाजुक डोर है, तो स्वार्थ की गाँठ भी।
प्रियंका इंग्लिश लिट्रेचर से ग्रेजुएट हैं और हिंदी से गजब का लगाव है। जन्म जमशेदपुर में हुआ और बचपन रेशम के शहर भागलपुर में बीता, पर जिंदगी रेशमी नहीं रही। लौहनगरी जमशेदपुर में इरादे और हौसले दोनों जवान हुए। फिलहाल वे तंजानिया में रह रही हैं।
फेसबुक पर काफी चर्चित हैं। थोड़ी मेहनत करेंगे तो मिल जाएंगी।

फेयरनेस क्रीम 

पड़ोस के खाली घर में नए किरायेदार आ गए थे। कई महीनों से बंद पड़ी घर की जलती हुई लाइट्स और चहल पहल ने विजय का ध्यान आकर्षित किया था!
पता नहीं कौन-कौन है इस फैमिली में। इनसे पहले जो थे उनके पढ़ाकू चश्माधारी बच्चों से एक भी नंबर कम आने पर विजय को मम्मी-पापा से बहुत डांट मिलती थी अच्छा हुआ जो उन अंकल का ट्रान्सफर हो गया और वो चले गए। उनसे पहले जो रहते थे उनके बच्चे काफी बड़े थे।
इस बार जो फैमिली आई है काश उनके कोई बच्चा न हो और अगर हो तो। बड़े तो बिलकुल नहीं हो और उन्हें पढाई से भी कोई मतलब नहीं हो।
शाम को जब विजय स्पोट्र्स क्लब के लिए निकला तो बगल वाले घर के गार्डन एरिया में स्टडी करते हुए एक लड़की दिखी जो लगभग उसी के उम्र की होगी।
पता नहीं जब हम लड़कों के खेलने का टाइम होता है उस वक़्त ये लड़कियां किताब लेकर क्यों बैठ जाती हैं? और इस सवाल का जवाब ढूँढ़ने के चक्कर में उस दिन के मैच में उसका परफॉरमेंस भी बहुत ख़राब रहा।
सन्डे की सुबह नुक्कड़ पर विजय अपनी मम्मी के साथ सब्जी लेने गया तो पड़ोस वाली लड़की आती दिखी साथ में एक आंटी भी थी, जो निश्चित ही उसकी मम्मी थी।
आते ही दोनों मम्मियाँ आपस में पुरानी सहेली की तरह बातों में मशगूल हो गर्इं और विजय कनखी से उस लड़की को देखने में, जो उस वक़्त बुत बनी खड़ी थी, सफ़ेद संगमरमर की बुत।
बिना किसी भाव के सपाट दूधिया चेहरा। उसपे तन के खड़ी गर्वीली नाक, काजल लगी चमकीली आँखें और गुलाबी होंठ। विजय ने उसे बहुत ध्यान से देखा, उसने घुटने से नीचे तक लंबी प्रâॉक पहन रखी थी और अपने बालों को एक साथ अपने सर पे बहुत ऊँचा बाँध रखा था।
उसकी मम्मी को जैसे अचानक ही ख्याल आया था ‘‘ये मेरी बेटी सुमन है।’’ कहते हुए उन्होंने विजय से ग्हूrद्ल्म कराया ‘‘और तुम्हारा क्या नाम है बेटा?’’
‘‘जी आंटी विज, मेरा मतलब है विजय।’’
‘‘बड़ा प्यारा नाम है, सुमी का एडमिशन भी तुम्हारे ही स्कूल में कराया है, नाइन्थ में पढ़ती है। तुम टेंथ में हो न? तुम्हारी मम्मी ने बताया।’’
‘‘जी आंटी।’’ कहते हुए विजय ने इस बार खुल कर सुमन को देखा वो उसे नहीं देख रही थी और न ही उसके चेहरे पर कोई भाव थे। वो इस वक़्त बिलकुल हिंदी कहानियों से निकल कर आई कोई परी या अंग्रेजी कहानियों की मोनालिसा सी लग रही थी।
उस रात मम्मी ने सोने से पहले जब उसके स्टडी टेबल पर गर्म दूध का ग्लास रखा तो वो उसके रंग में खो गया। बिलकुल ऐसा ही तो रंग है उसका ‘दूधिया’। जरूर उसकी मम्मी उसे दूध पिलाती नहीं होगी बल्कि दूध से नहलाती होगी सोचते हुए उसने दूध का ग्लास एक सांस में ही ख़ाली कर दिया।
स्कूल जाने से पहले साइकिल साफ़ करने के बहाने से उसे स्कूल जाने के लिए बस में चढ़ता हुआ देखना फिर स्कूल में जल्दी से लंच फिनिश कर उसे ढूँढ़ता और अगर कभी वो एक दूसरे को देख लेते तो वो अपना चेहरा घुमा लेती। कई बार तो विजय को लगता जैसे उसकी आँखें भी उसे ही ढूंढ रही थीं लेकिन उसका मुँह फेर लेना तत्काल ही उसके भ्रम को दूर कर देता।
छुट्टी होने पर अपनी साइकिल से उसकी बस का पीछा करना… लेकिन आखिर कब तक, बस आगे निकल जाती और वो पीछे रह जाता।
विजय उसके क्लास रूम के कितने ही चक्कर लगा लेता, लेकिन वो एक बार भी पलट कर नहीं देखती। अगर कभी गलती से सामने पड़ भी जाती तो चेहरा घुमा लेती और उसका चेहरा घुमा लेना विजय को लाल चींटी के काटने जैसा तिलमिला देता।
बाकी लड़कों का भी उसके प्रति आकर्षित होना स्वाभाविक था लेकिन वो सबसे एक खास दूरी बनाये रखती, पहले दो चार लड़कों ने ट्राई भी किया लेकिन उसकी उदासीनता से वो चिढ़ गए ‘‘हमसे इतनी ही प्रॉब्लम थी तो गल्र्स स्कूल में एडमिशन लेती।’’ अंतत: सबने उसे ‘लेडी डारसी’ उपनाम दे दिया।
‘‘विज तू क्यों नहीं ट्राय करता?’’ एक दिन एक क्लास फ्रेंड मनीष ने पूछा तो विजय ने कहा ‘‘मैं कौन सा प्रिंस बेन्नेट हूँ।’’
‘‘लेकिन कम भी तो नहीं, क्लास का टॉपर है, हाँ थोड़ा ज्यादा डार्क है लेकिन हैंडसम है। लेडी डारसी जैसी लड़की के लिए तू कम्पलीट पैकेज है यार।’’
‘‘लेकिन हो सकता है उसे ‘कम्पलीट’ नहीं किसी ‘स्पेशल पैकेज’ की चाहत हो।’’ उसकी बेरुखी को याद करते ही विजय ने बुझे हुए स्वर में कहा था।
‘‘स्कूल की कितनी ही लड़कियां तो तुझपे फ़िदा है, और अपने ग्रेड की सेकंड टॉपर शैलजा को कैसे भूल गए, किसी को घास नहीं डालती लेकिन तुम्हारे साथ ग्लू लगाकर चिपकी रहती है।’’
‘‘वो इसलिए, क्योंकि एक तो हम बेस्ट फ्रेंड्स है दूसरे मैथ में मैं उससे बेहतर हूँ।’’ विजय अब भी उत्साहित नहीं था।
‘‘तो लेडी डारसी से फ्रेंडशिप करने ही तो कह रहा हूँ, उसकी भी कोई न कोई कमज़ोरी जरूर होगी और तू उसके काम आ सकता है क्योंकि तेरा तो सब स्ट्रांग है कहते हुए उसने बायीं आँख मारी।’’
इतने में बेल बजी और पीरियड के बाद अगली पीरियड पर डिस्कशन करते हुए सब अपने अपने क्लास की ओर चल दिए।
जाते जाते विजय उसके क्लास रूम की ओर देखता हुआ गया, वो अपनी एक फ्रेंड के साथ अपने क्लास में ही थी और दोनों किसी बात पर हँस रही थी शायद बुद्धू लड़कों पर जो उन्हें छुप-छुप कर देखते हैं।
विजय ने मन ही मन निर्णय ले लिया था अब से वो उसे छुप-छुप के नहीं देखेगा।
मैथ्स का पीरियड था। वंदना मैम ने आते ही क्लास को अलजेब्रा का एक सम सॉल्व करने का टास्क देकर खुद के चेहरे पर जिओमट्री के सवालों सी उलझी रेखाएं बनाकर क्लास से बाहर देख रही थी और इस बात का फायदा उठाते हुए शैलजा ने इशारे से विज से हेल्प मांगी।
विज ने अपनी नोटबुक डेस्क पर खड़ी करके शैलजा की तरफ घुमा दी, शैलजा ने पहले उसके नोटबुक को ध्यान से देखा फिर अपनी नोटबुक पर झुक गई।
हमेशा से सबसे पहले प्रॉब्लम सॉल्व करने वाला विजय आज मैम के चेहरे के सवाल में उलझ गया था।
मैम इतनी उदास क्यों हैं? क्या हुआ होगा? मम्मी तो तब उदास होती हैं जब पापा से लड़ाई होती है। लेकिन मैम की अभी तक शादी भी नहीं हुई है।
फिर क्या कारण हो सकता है?
विज जब नाइन्थ में था तब पहली बार उसका वंदना मैम से सामना हुआ था। वो सिर्फ सीनियर क्लास को ही मैथ्स पढ़ाती हैं और ज्यादातर शिफॉन की हल्की और पतली साड़ी पहन कर आती हैं। विजय को साड़ी में वो माधुरी दीक्षित लगती हैं।
विजय का सबसे पहले सम को सॉल्व करके ‘मैम आई डन’ कहने पर कुछ दिन तक तो मैम ने रिस्पान्स किया लेकिन बाद में इग्नोर करने लगी थी और सारा फोकस मनीष पर देने लगी थी, जो मैथ में मुश्किल से पास होता था शायद इसलिए क्योंकि विजय बहुत सांवला है और मनीष बहुत गोरा।
आजकल टीवी पर पुरुषों के लिए भी फेयरनेस क्रीम के लगातार आ रहे ऐड से उसे यकीन हो गया था कि ये उसका काला रंग ही है जो क्लास का टॉपर होने के बाबजूद न वंदना मैम उसपे ध्यान देती हैं और न लेडी डारसी।
उसे इस बात से को़फ्त होने लगी थी कि वो पापा की तरह ज्यादा सांवला क्यों है, मम्मी की तरह फेयर क्यों नहीं।

अपने जेब खर्च से पैसे बचाकर विजय एक फेयरनेस क्रीम ले आया जिसे अपने स्कूल बैग में ही छुपा कर रखता था और स्कूल पहुँचने से पहले रुक कर लगा लेता था।
अब मैं भी गोरा हो जाऊंगा और ये दोनों मुझे इग्नोर नहीं कर पायेगी।
इतने में मैम की आवाज़ आई ‘‘विजय क्या तुमसे भी नहीं हुआ।’’ तो वो जैसे नींद से जागा।
‘‘नहीं मैम मैंने तो सॉल्व कर लिया!’’
‘‘तो बताया क्यों नहीं?’’ मैम ने बहुत सॉफ्ट स्वर में पूछा था? विजय कुछ कहता इससे पहले ही मैम ने कहा ‘‘ओके दिखाओ।’’
फेयरनेस क्रीम अपना काम कर रही है। बस पंद्रह दिन में इतना असर!! उसका दिल गिल्ली की तरह उछल रहा था और मन में दीवाली के पटाखे फूट रहे थे, फटाक फटाक!!
मैम उसका नोटबुक चेक कर रही थी और वो मैम को। मैम का फिगर 8 की तरह है, इसलिए वो अक्सर 8 के ऊपरी हिस्से में आँखें नाक और लिप्स बनाकर औरत की शक्ल दे देता है। कभी दो चोटियाँ, कभी टॉप नॉट तो कभी खुल्ले बाल बिलकुल मैम की तरह।
मैम ने आज आसमानी कलर की साड़ी पहनी है। लेकिन मैचिंग ब्लाउज के अंदर से उनकी काली ब्रा उनके अंदरुनी राज खोल रहा है। और उनके बदन से मिलकर आने वाली हल्के परफ्यूम की खुशबू विजय को एक अलग ही दुनिया में ले जा रही थी।
मैम ने राईट के टिक के नीचे सिग्नेचर कर विजय को एक्सीलेंट कहते हुए उसका नोटबुक वापस कर दिया। वो मैम के सिग्नेचर को चूम लेना चाहता था लेकिन मैम ने सबके लिए ब्लैक बोर्ड पर भी बनाने के लिए कहा और उसका मन बुझ गया।
घर पहुँच कर सबसे पहले उसने नोटबुक निकाल कर मैम के सिग्नेचर को चूमा। फिर देर तक खयालों में मैम के साथ हिंदी सिनेमा के डुएट गाता रहा और गुलाब के फूल आपस में टकराते रहे।
विजय ने आज दो 8 बनाये। एक को ब्लू कलर की साड़ी पहनाई और दूसरे को स्कूल यूनिफार्म। फिर उसे उसी फोल्डर में रख दिया जिसमें पहले से अलग अलग रंग की साड़ी पहने हुए कई 8 रखे थे।
आज उसे लेडी डारसी की बिलकुल भी याद नहीं आई। वो उसे गार्डन एरिया में स्टडी करते हुए देखने भी नहीं निकला। आज उसपे शिफॉन की पतली और हल्की सारी पहनी वंदना मैम तारी थी जो कभी खुद बारिश में भीग रही थी तो कभी अपने गीले बालों से उसपे बारिश कर रही थी।
अचानक ही उसे ख्याल आया कि शैलजा ने भी सम सॉल्व कर लिया था फिर उसने मैम को बताया क्यों नहीं?
एक ही स्कूल में पढ़ने के कारण दोनों में बचपन से दोस्ती है। लेकिन बढ़ती हुई उम्र के साथ विजय अंतर्मुखी हो गया और उसकी दुनिया उसके किताबों में सिमटती चली गई जबकि शैलजा बहुर्मुखी है। उसे बातें करना बहुत पसंद है, हमेशा बोलती रहती है विजय को उसकी बातों की आदत हो गई है। जब कभी वो स्कूल नहीं आती है विजय उसे बहुत मिस करता है।
शैलजा को वंदना मैम बहुत खड़ूस लगती हैं और लेडी डारसी मेन्टल सिक और ये बात वो विजय से रोज ही कहती है। लेकिन विजय उसकी इस राय पर हमेशा चुप रहता है। एक बार विरोध किया था तो शैलजा ने फट से कहा ‘‘हाँ तुम लड़कों को तो अच्छी ही लगेगी।’’ ये कहकर उसने मुँह फेर लिया था।
विजय को लगा वो रंगे हाथ पकड़ा गया लेकिन शैलजा की नाराज़गी दूर करने के ख्याल से कहा ‘‘मुझे भी ये दोनों अच्छी नहीं लगती।’’
‘‘क्योंकि तुम अच्छे हो और तुम इसलिए अच्छे हो क्योंकि मेरे दोस्त हो।’’ अपने चेहरे पर आत्मुग्धता का भाव लिए शैलजा उस वक़्त विजय की आँखों में समा गई थी लेकिन उसकी तंत्रिका कोशिकाएं तो श्वेत उत्तकों के मोहपाश में बंधी है।
शैलजा के सिर्फ नैन नक्श ही शार्प नहीं हैं बल्कि उसका माइंड भी बहुत शार्प है। क्लास में विजय के बाद उसी का स्थान है। हाँ वो लेडी डारसी और वंदना मैम की तरह फेयर नहीं है और फेयरनेस क्रीम तो बिलकुल भी नहीं लगाती है लेकिन विजय को लगता है फेयरनेस क्रीम में मिरेकल ingredients है।
एग्जाम में बहुत ज्यादा समय नहीं रह गया है इसलिए आजकल विजय घर से बाहर बहुत कम निकलता है। स्कूल से घर और घर से स्कूल बस, लेडी डारसी को तो वो लगभग भूल ही चुका था।
अभी भी वो अपने कमरे में स्टडी ही कर रहा था जब कॉल बेल की धार्मिक संगीत के साथ पूरे घर का वातावरण मंदिरमय हो गया।
मम्मी किचन में थी सो रिफ्रेशमेंट की गरज से विजय ने दरवाजा खोला तो सामने मुस्कुराती हुई बगल वाली आंटी थीं, सुमी के साथ,ऐसे तो आंटी अक्सर आती रहती है लेकिन आज सुमी भी थी।
‘‘डिस्टर्ब तो नहीं किया?’’ आंटी ने पूछा तो सुमी को देखते ही मन ही मन रिफ्रेश हो चुके विजय ने कहा ‘‘नहीं आंटी आइये!’’
‘‘सुमी कह रही थी तुम्हारी इंग्लिश बहुत अच्छी है’ क्या उसकी थोड़ी हेल्प कर सकते हो?’’ विजय कुछ कहता इससे पहले ही किचन से आकर मम्मी बोल पड़ी ‘‘मेरा बेटा तो आल राउंडर है। और फिर ज्ञान बांटने से ही तो बढ़ता है, क्यों नहीं करेगा हेल्प? जरूर करेगा।’’ मम्मी ने घमंड और ख़ुशी के मिश्रित भाव पर काबू पाते हुए कहा था।
सुमी को william wordsworth  की slumber did my spirit समझना था जिसे विजय ने उसे बड़ी आसानी से समझा दिया और वो चली गई।
सुमन के जाने के बाद विजय ने फेयरनेस क्रीम के इंग्रेडेन्ट को कई बार पढ़ा लेकिन उसमे उसे ‘मिरेकल’ कहीं नहीं दिखा।
उस रात उसने सोने से पहले भी क्रीम लगाया। क्योंकि आज ही उसने देखा कि ट्यूब पर दिन में दो बार लगाने की सलाह लिखी थी।
शैलजा ने नोटिस किया था आज विजय के चेहरे पर अलग सी चमक थी।
लंच टाइम में जब सारे अपने फेवरीट लेडी डारसी की ही बातें कर रहे थे अचानक ही सामने से आकर उसने ‘‘हेल्लो विजय।’’ कहा था।
वैसे तो हमेशा की तरह आज भी वो सिर्फ श्रोता ही था लेकिन फिर भी झेंपते हुए कहा ‘‘हाय।’’
‘‘एक्चुअली कल मैं तुम्हें थैंक्स कहना भूल गई थी विजय।’’
‘‘its my pleasure सुमन, any time.।’’
विजय और सुमन बातें कर रहे थे लेकिन बाकी सब सिर्फ उन दोनों का चेहरा देख रहे थे।
‘‘वो तुम्हें थैंक्स क्यों कह रही थी?’’ एक बार और थैंक्स कहकर सुमी के जाते ही शैलजा ने पूछा।
जबकि मनीष ‘‘तेरा जादू चल गया…..।’’ सांग गुनगुना रहा था।
‘‘मैंने लिटरेचर में उसकी हेल्प की थी।’’ विजय ने आदतन संक्षिप्त सा उत्तर दिया।
‘‘लेकिन कब? मैं तो कल एब्सेंट नहीं थी।’’
‘‘वो मेरे घर आई थी।’’
‘‘तुम्हारे घर का एड्रेस किसने दिया उसे?’’
‘‘वो मेरे पड़ोस में रहती है।’’ ये सुनते ही शैलजा उठ कर चली गई।
‘‘ये तुमने ठीक नहीं किया विजय।’’ कहते हुए मनीष शैलजा के पीछे गया।
शैलजा अब विजय से दूर रहने लगी है। लेकिन हाँ यदि कभी मैथ में कुछ पूछना होता है तो पूछ लेती है और वो मना भी नहीं करता है।
विजय इसे सिर्फ उसकी नाराज़गी समझता है लेकिन दोस्तों ने पूछना शुरू कर दिया था ‘‘क्या उनका ब्रेकअप हो गया है।’’ लेकिन कोई एक्सप्लेन नहीं कर पाया कि असल में हुआ क्या है।
धीरे धीरे शैलजा और मनीष कुछ ज्यादा ही साथ रहने लगे थे। लंच भी साथ साथ करते थे। मनीष शायद शैलजा के लिए कुछ अलग सा फील करता था जो नार्मल से ज्यादा था और अब उसे मौका मिल गया था लेकिन ये बात विजय को बहुत तक़लीफ़ दे रही थी।
वो शैलजा से कहना चाहता था अगर मैं अच्छा हूँ तो फिर क्यों?? लेकिन अपने अंतर्मुखी स्वभाव के कारण चुप ही रहा।
मैथ की क्लास थी इसलिए सब भूल कर वो वंदना मैम पर फोकस करना चाहता था लेकिन हल्के ग्रीन पर ब्लैक कलर से बने फ्लॉवर वाली साड़ी पहनी वंदना मैम आज उसका ध्यान शैलजा और मनीष से हटा नहीं पा रही थी।
मैम ने कहा ‘‘अब ‘प्री एग्जाम’ में बहुत कम दिन बचे है इसलिए आज वो पढ़ायेगी नहीं बल्कि सबसे बात करना चाहती हैं। जानना चाहती है कि अपने करियर के बारे में किसने क्या सोचा है।’’
किसी ने डॉक्टर कहा, किसी ने इंजीनियर, किसी ने रिपोर्टर किसी ने कहा आपकी तरह मैम।
मनीष ने कहा वो आर्मी ज्वाइन करना चाहता है
मैम ने कहा ‘‘तुममे पोटेंशियल है, तुम घ्घ्ऊ कर सकते हो, आर्मी ही क्यों??’’
‘‘क्योंकि मैं देश की सेवा करना चाहता हूँ।’’
‘‘वो तो इंजीनियर भी करते है।’’
‘‘लेकिन अपने सपनों के पीछे भागने वाले ही उसे सच कर पाते है।’’
‘‘विजय ने कहा वो साइंटिस्ट बनना चाहता है!’’
‘‘साइंटिस्ट ही क्यों?’’ मैम ने चेहरे पर कॉन्फिडेंट स्माइल के साथ पूछा था।
‘‘मैं एक ऐसी मेडिसिन बनाना चाहता हूँ जिसको खाते ही इंसान के शरीर का रंग बदल जायेगा।’’
‘‘मतलब?’’ मैम शायद समझ नहीं पाई थी।
‘‘मतलब। मेरी बनाई हुई मेडिसिन खाते ही काला या सांवला इंसान गोरा बन जायेगा।’’
‘‘ऐसी मेडिसिन क्यों??’’
‘‘क्योंकि आज कल लोग पैकिंग देखते है।’’ विजय ने ये बात शैलजा को देखते हुए कहा था।
मैम के चेहरे पर puzzled रेखाएं उभर आई थी। लेकिन आगे कुछ और नहीं पूछना ही उन्हें ठीक लगा।
शैलजा ने कहा वो हाउस मेकर बनना चाहती है
‘‘हाउस मेकर क्यों?? तुम तो बहुत शार्प हो। कुछ भी बन सकती हो।’’
‘‘मैम। मेरे ख्याल से पुरुष और महिला की जिम्मेदारियां अलग अलग होती है, पुरुष का कार्य क्षेत्र घर के बाहर है और एक स्त्री का घर के भीतर।’’
‘‘अगर ऐसा है तो मैं आज यहाँ तुमसे ये सवाल नहीं पूछ रही होती।’’ मैम ने तल्ख़ लहजे में कहा था।
‘‘मैम मैंने पहले ही कहा ये मेरी व्यक्तिगत राय है।’’
‘‘अपनी व्यक्तिगत राय को कैसे जस्टिफाई करोगी तुम?’’
‘‘कर सकती हूँ मैम। मेरे पड़ोस में एक न्यूली वेड कपल आया है उनका एक छोटा सा बच्चा भी है, दोनों जॉब करते हैं ऑफिस जाने से पहले वो अपने बच्चे को क्रेच में रख जाते हैं और शाम को वापसी पर लेते आते हैं। उनके घर से रोज लड़ाई की आवाज़ के साथ साथ बच्चे के रोने की आवाज़ आती है।’’
‘‘ये आवाज़ें क्यों आती है ये आप खुद समझ सकती है बस सोचने की ़जरूरत है।’’
मैम सचमुच सोचने लगी थी। सोचते सोचते ही कहा था ‘‘एक example लेकर idea नहीं बनाया जा सकता।’’
‘‘मैम जब बच्चे की परवरिश माँ के हाथों होती है तभी उनमें संस्कार आते हैं। लेकन जब औरत घर के बाहर जायेगी तो घर और बच्चे को कौन संभालेगा?’’ शैलजा के इस सवाल के साथ ही बेल बजी और मैम ने अपना बैग उठा लिया और विजय शैलजा की कही हुई बात में खो गया।
रास्ते में साइकिल पंक्चर हो गई थी। घर देर से पँहुचा तो मम्मी घर के बाहर परेशान होकर उसका वेट करती हुई मिली लेकिन विजय को देखते ही उन्होंने संतोष की एक गहरी सांस ली फिर खाना लगाते हुए देर से आने का कारण भी पूछ लिया।
ठीक ही तो कह रही थी शैलजा। अगर मम्मी भी जॉब पे जाती तो कौन घर पर उसके लिए इतना परेशान हो रहा होता। उसका इतना ख्याल कौन रखता? मम्मी एजुकेटेड हैं इसलिए उसने कभी ट्यूशन नहीं लिया हमेशा उसे मम्मी ही पढ़ाती आई हैं। शादी से पहले मम्मी भी जॉब करती थी लेकिन शादी के बाद उनकी प्रायारिटी घर पापा और विजय बन गए थे। विजय शैलजा की कही हुई बात को बहुत अच्छे समझ पाया था।
शाम को सुमी फिर से आई लेकिन इस इस बार आंटी उसके साथ नहीं थी बल्कि उसके हाथ में इंग्लिश लिटरेचर की बुक थी उसे jane austin की pride and prejudice समझना था।
आज पहली बार विजय उसे देख कर बिलकुल भी खुश नहीं हुआ था, ‘‘क्या तुम मुझसे नाराज़ हो?’’ सुमी ने पूछा तो विजय ने मना कर दिया ‘‘नहीं।’’
‘‘तुमने अपने करियर के बारे में क्या सोचा है सुमन?’’ विजय ने अचानक ही पूछा था।
‘‘मुझे मॉडलिंग में जाना है।’’ कहते हुए सुमी की आँखों में चमक थी।
‘‘लेकिन तुम तो पढ़ाई में बहुत सीरियस हो।’’ विजय को आश्चर्य हुआ था।
‘‘पढ़ाई से मुझे कोई खास मतलब नहीं है विजय।’’ सुमी ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा था और विजय वो समझ गया जो सुमी की आँखें कहना चाहती थी।
विजय की सारी wish hetjer पूरी’ हो गई थीं लेकिन पता नहीं क्यों उससे उसे कोई खास ख़ुशी नहीं हुई।
वंदना मैम आजकल छुट्टी पर थीं, बहुत दिनों से नहीं आ रही हैं, लेकिन विजय उन्हें नहीं शैलजा को मिस कर रहा है। वो शैलजा से बात करना चाहता है लेकिन फिर उसे मनीष के साथ देखकर दुखी हो जाता। और उसका दुख लेडी डारसी की स्माइल से भी दूर नहीं होता था जो आजकल अक्सर विजय को देखते ही उसके चेहरे पर अपने आप आ जाती है।
मनीष ने कहा ‘‘आखिर तुमने लेडी डारसी से भी दोस्ती कर ही ली।’’
‘‘और तुम शैलजा से ग्लू लगाकर चिपक गए।’’ विजय अपने गुस्से को छुपा पाने में असमर्थ हो गया था।
‘‘एक मौका तो सबको मिलना चाहिए।’’ मनीष ने कहा तो विजय और ज्यादा चिढ़ गया ‘‘ये मौका लेडी डारसी के साथ भी तो ओपन था।’’
‘‘तो तुम्हें इस बात से गुस्सा आ रहा है कि तुम्हारे बचपन की दोस्त अब मेरी दोस्त है।’’
‘‘वो अब भी मेरी दोस्त है सिर्फ नाराज़ है बस।’’ कहकर विजय चला गया।
सिकनेस का बहाना करके वो स्कूल से जल्दी घर आ गया, मम्मी बहुत परेशान हो गई थी, उसने कहा सर में दर्द है, आराम करना चाहता है और अपने कमरे में चला गया।
मम्मी को लगा फाइनल एग्जाम का स्ट्रेस है थोड़ी देर आराम करेगा तो ठीक हो जायेगा।
पता नहीं गलती कहाँ हो गई?। क्या मैंने ठीक से साइड इफ़ेक्टस नहीं पढ़ा? सोचते हुए विजय ने अपने बैग से फेयरनेस क्रीम की ट्यूब निकाली लेकिन इसमें तो ये नहीं लिखा कि ‘इसके इस्तेमाल के बाद बेस्ट फ्रेंड दूर हो जाते है’ फिर मनीष की बात याद कर के उसे और गुस्सा आ रहा था, गुस्से में उसने फेयरनेस क्रीम की पूरी ट्यूब toilet में निकाल दी।
मम्मी ने कहा सुमन मिलने आई है, विजय ने कहा ‘‘कह दीजिये मैं सो रहा हूँ।’’ मम्मी मन ही मन खुश हो रही थी ‘‘ये पंजाबी कुड़ी तो मेरे बेटे के पीछे ही पड़ गई है, हे मुरगन विजय की तमिल गर्ल फ्रेंड  ही बनाना।’’
विजय स्कूल जाना नहीं चाहता था लेकिन नहीं जाने का कोई बहाना भी नहीं है। वैसे भी आज तो टेस्ट का रिजल्ट है फिर कल सैटरडे को फेयरवेल उसके बाद स्कूल बंद लेकिन इतना समय काफी है शैलजा को मनाने के लिये। मन ही मन कुछ सोच कर खुश हो गया था विजय।
रिजल्ट आ गया है हमेशा की तरह विजय ने टॉप किया और शैलजा ने पहली बार उसे बराबर की टक्कर दी खास कर मैथ में मनीष शैलजा और विजय तीनों को बराबर अंक मिले थे।
विजय ने शैलजा और मनीष को बधाई दी तो शैलजा ने कहा ‘‘मैंने और मनीष ने कम्बाइन्ड स्टडी की थी।’’
‘‘मुझे बताया नहीं? मैं भी आ जाता।’’ विजय बहुत निराश हो गया था।
‘‘तुमने भी तो नहीं बताया था कि सुमन तुम्हारी nightbour  है।’’ शैलजा ने तपाक से कहा।
‘‘चलो हिसाब बराबर अब तो गुस्सा मत रहो।’’ विजय ने दोस्ती करने की ग़रज़ से कहा।
‘‘मैं गुस्सा कब थी?’’ शैलजा के इस सवाल पर विजय को कोई जवाब नहीं सुझा।
उस दिन के बाद वंदना मैम आज स्कूल आई थी। personally बधाई और शुभकामनाओं के साथ-साथ तीनों को शाम अपने घर बुलाया लेकिन ये सुनकर विजय उतना खुश नहीं हुआ था जितना उसे होना चाहिए था क्योंकि उसके और शैलजा के साथ साथ मनीष भी invited है।
‘leisure’ पीरियड में सारे अपने माक्र्स डिस्कस कर रहे थे जब विजय ने लेडी डारसी को दूर से आते देख अपनी नज़रें चुरा लीं।
उसने अपने उपनाम को अपरिभाषित करते हुए पहले तो विजय से रिजल्ट पूछा फिर कहा मुझे तुमसे कुछ पर्सनल बात करनी थी। कल मैं तुम्हारे घर भी गई थी लेकिन तुम सो रहे थे। क्या थोड़ी देर के लिए साइड में आ सकते हो?
विजय और सुमी थोड़ी दूरी पर खड़े होकर बात कर रहे थे। इतनी ही दूरी कि कोई उनकी बात न सुन सके।
सुमी ने कहा ‘‘तुम मुझे अवॉयड कर रहे हो।’’
‘‘नहीं मैं concentrate कर रहा हूँ।’’ विजय के इस जवाब पर सुमी चुप हो गई थी शायद वो उसके जवाब को समझ नहीं पाई थी।
‘‘अरे अपना विजय तो बहुत टैलेंटेड निकला।’’ मनीष के इस कटाक्ष पर शैलजा ने तुरंत ही जवाब दिया था जो कनखियों से उन्हें ही देख रही थी ‘‘विजय नहीं, लेडी डारसी ओह सुमन टैलेंटेड है। जो अब तक avoid and won game खेल रही थी!’’
सुमी ने पिंक कलर की चमकीली जिल्द चढ़ी किताब जैसा ही एक पैकेट ‘‘पढ़ना जरूर।’’ कहते हुए दिया।
पैकेट को अपने बैग में रखते हुए विजय को डरी हुई सहमी हुई फेयरनेस क्रीम की ट्यूब दिख गई और उसके चेहरे पर उदासी का रंग चढ़ गया।
आम तौर पर स्कूल में प्री-टेस्ट के परिणाम के बाद के माहौल जैसा ही माहौल था। अगली पीरियड भी खाली थी। मैम आई तो थीं लेकिन क्लास लेने नहीं आई। इस मौके का फायदा उठाते हुए विजय अंतिम डेस्क पर सबसे नज़र बचाकर सुमी का गिफ्ट खोल रहा था।
वैसे भी ज्यादातर चुप रहने के कारण विजय के दोस्त कम थे और जो थे उन्होंने अलग दोस्त बना लिए क्योंकि ‘‘लेडी डारसी।’’ ने उससे दोस्ती कर ली थी।
खैर, पैकेट में चेतन भगत की ‘two states’ थी, नावेल के पन्ने पलटते ही विजय को उसमे एक लेटर मिला जिसे उसने अपने पॉकेट में रख लिया और किताब वापस बैग में।
फिर बड़ी ही चालाकी से उस लैटर को अपने टेक्स्ट बुक के बीच रख कर पढ़ा, वो खून से लिखा हुआ एक लव लैटर था। सुमी से बुक लेते हुए विजय ने उसकी ऊँगली से लिपटे band-aid को नोटिस किया था। खैर लैटर में सुमी ने सीधे-सीधे तीन शब्दों में अपने प्रेम का इज़हार किया था और साथ में एक और अलग से छोटा सा चिट जैसा लैटर था। जिसमें हिंदी फ़िल्म की नक़ल में ‘‘अगर तुम्हारी भी हाँ है तो कल फेयरवेल में ब्लू शर्ट पहन कर आना’’ लिखा था। इसी सब के बीच चुपके से वो ये भी देख रहा था कि शैलजा ने कई दफा बहाने से पीछे मुड़ कर उसे देखा।
विजय का दिमाग उस वक्त कम्प्यूटर से भी ज्यादा तेज़ चल रहा था, उसने सुमी की चिट हटा कर खून से लिखे लेटर के साथ एक दूसरी चिट लगा दी जिसमे उसमे लिखा था ‘‘कल फेयरवेल में शिफॉन की साड़ी पहन कर आना’’!
विजय को यकीन था अब शैलजा नाराज़ नहीं रह पायेगी।
विजय जब वंदना मैम के घर पंहुचा तो मनीष और शैलजा वहां पहले से मौजूद थे। विजय के पहुँचने के बाद भी मैम कभी कलाई से बंधी घड़ी तो कभी दरवाजे की ओर देख रही थीं। अंतत: कॉल बेल बजी और मैम ने लगभग दौड़ते हुए दरवाजा खोला।
वो एक बेहद ही अनाकर्षक आर्मी ऑफिसर थे, मैम ने कहा ये उनके बचपन के मित्र है जिनसे जल्द ही उनकी शादी होने वाली है।
मैंने जॉब से रिजाइन कर दिया है क्योंकि शादी के बाद मैं घर के भीतर का काम संभालना चाहती हूँ, कहते हुए वो शैलजा को देख रही थी जिससे शैलजा के चेहरे पर एक गर्वित स्माइल आ गई थी।
अपने सपनों के पीछे भागने वाले ही उसे सच कर पाते है और सपना अगर देश की सुरक्षा है तो ऐसे सपने को सलाम करती हूँ मनीष, क्योंकि ऐसे सपने पालने वाले बेशकीमती हीरे होते है। कहते हुए मैम ने उसे सैल्यूट किया और जवाब में सबने एक साथ सैल्यूट किया।
बाहरी रंग रूप तो आवरण है और यदि कोई आवरण से प्रेम करे तो निश्चित रूप से वो क्षणिक है सच्चा प्रेम तो वो है जो कोई तुम्हारे मन से करे विजय, क्योंकि मन की सुंदरता ही निरंतर बनी रहती है।
शैलजा विजय को देख रही थी और विजय मैम को, उनका चेहरा सोने सा चमक रहा था क्योंकि उन्होंने हीरा चुना था।
आज फेयरवेल पार्टी है, लेडी डारसी, विजय और शैलजा तीनों स्माइल कर रहे थे, शैलजा ने शिफॉन की साड़ी पहनी है और विजय ने ब्लू शर्ट।

2 thoughts on “फेयरनेस क्रीम (कहानी – प्रियंका ओम) अंक-1

  1. सुंदर कहानी, यह कहानी ‘ वो अजीब लड़की ‘ संग्रह से है और पूरा संग्रह ही लाजवाब है ।

  2. नाम बड़े और दर्शन छोटे..बड़ा नाम सुना था..ये तो नंदन चंपक से भी बकवास कहानी है..इससे कहीं ज्यादा शानदार कहानियाँ तो मैं आठवीं क्लास में प्रतियोगिता दर्पण में पढ़ा करती थी।आज से 15साल पहले।

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