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संपादकीय – वीनस केसरी – अंक-1

आज अंजुमन ई-पत्रिका का यह पहला अंक प्रस्तुत करते हुए कई बातें मन में हैं| पिछले वर्ष अक्टूबर महीने में अंजुमन प्रकाशन की ओर से छमाही पत्रिका शुरू करने का विचार बना था और पहला अंक (जनवरी-जून-2016) प्रकाशित हुआ था| दूसरे अंक (जुलाई-दिसंबर-2016) की तैयारी भी पूरी हो चुकी है और जल्द ही छमाही पत्रिका का दूसरा अंक आपके हाथों में होगा|

छमाही पत्रिका के दूसरे अंक के लिए रचनाएं भेजने के लिए मात्र तीन दिन का समय दिया गया था, मगर तीन दिनों में भी इतनी अधिक रचनाएँ प्राप्त हुई कि निर्णय लेना कठिन हो गया कि किसे प्रकाशित किया जाये और किसे छोड़ा जाये|

छमाही पत्रिका निकालने पर, प्रकाशन की अपनी सीमाओं के चलते, दूसरे अंक में हमें न चाहते हुए भी कई अच्छी रचनाएँ और आलेख छोड़ने पड़े| यदि तिमाही पत्रिका प्रकाशित करने का विचार बनता तो निश्चित ही इस ई पत्रिका की आवयश्कता प्रतीत न होती मगर तिमाही पत्रिका प्रकाशित करने से प्रकाशन की अन्य गतिविधियाँ प्रभावित होतीं| क्योकि तिमाही पत्रिका निकलना तप कर्म है|  इस कारन निर्णय लिया गया कि पाक्षिक ई-पत्रिका ही शुरू की जाये| और परिणाम स्वरूप यह पहला अंक आपकी नज़रों के सामने है|

अभी ई-पत्रिका के स्वरूप को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है मगर विचार है कि प्रत्येक अंक में एक संपादकीय होगा तथा पन्द्रह रचनाओं को शामिल किया जायेगा और साहित्य की सभी विधाओं को प्रकाशित किया जायेगा| कुछ स्तंभकार जुड़ना चाहें तो अगले अंक से कुछ स्थाई स्तंभ भी पढने को मिल सकते हैं| पाक्षिक पत्रिक के स्वरूप अनुसार प्रत्येक महीने में दो अंक प्रकाशित होंगे (1 तारीख तथा 16 तारीख को)

प्रत्येक अंक की रचनाएं साइड बार में ऊपर मिलेंगी,  तथा उसके नीचे “कैटेगरी सर्च” द्वारा  विषयवार भी रचनाओं को देखा जा सकता है

अगले अंक के लिए रचनाएँ आमंत्रित हैं| रचनाएँ भेजने के लिए पेज पर बगल में लगे बैनर पर क्लिक कर के पूरी जानकारी प्राप्त की जा सकती है
संपादकीय तथा सभी रचनाओं के नीचे कमेन्ट बॉक्स पर सुझाव तथा विचार आमंत्रित हैं

– वीनस केसरी

4 thoughts on “संपादकीय – वीनस केसरी – अंक-1

  1. सराहनीय प्रयास और इस पहले अंक में मुझे जगह मिली उसके लिए आभारी हूँ । आशा ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है कि साहित्य के क्षेत्र आपका यह कदम भी नए मापदण्ड स्थापित करेगा । अगले अंक का इंतजार रहेगा ।

  2. अनिल कुमार सोनी August 26, 2016 at 11:31 pm

    समयाभाव के कारण मैं रचना नहीं भेज पाया हूँ।
    साहित्य जगत में ये अंजूमन पत्रिका नई क्रांति आयेगी एवं पत्रिका में उन लोगों को अवसर मिलेगा
    जिनका पत्रकार कवि सो गया था अब लेखन से जाग जायेगा ।
    “जो कलम सरीखे टूट गये पर झुके नहीं”
    अब सब अपने ह्रदय की देश काल की रचनायें लिखना प्रारंभ करेंगें ।

    अनिल कुमार सोनी
    मध्यप्रदेश भारत

  3. प्रयास अत्यंत सराहनीय है. अंक की रचनाएँ और आलेख पठनीय हैं. रचनाकारों का चयन आकर्षक है.
    यह तो अवश्य है कि कुछ भी कीजिए कुछ न कुछ कमी बनी रहती है. वस्तुतः ये कमियाँ ही निरंतर और अधिक अच्छा करने तथा अनवरत आगे बढ़ने को प्रेरित करती हैं. उस हिसाब से पत्रिका का पहला अंक तनिक और श्रम तथा समय मांग रहा था.
    साहित्याकाश में विस्तार पाने को उत्सुक अपने आंगन के इस नवांकुर का हार्दिक स्वागत है.

    एक बात:
    हर पेज के साथ एक मिनट की प्रतीक्षा मानों पाठक के धैर्य का इम्तहान लेती हुई-सी है. पहली दफ़ा पेज के ऑन होने में लगा एक-मिनट का वक़्त जहाँ आकर्षित करता है, एक इन्नोवेटिव आइडिया-सा लगता है, वहीं हर पेज के साथ ऐसा होना झुंझलाहट का कारन बन कर सामने आता है. इस हेतु तार्किक सोच आवश्यक है.
    अशेष शुभकामनाएँ

  4. Motilal alamchandra August 29, 2016 at 2:17 am

    सराहनीय कदम.. शुभकामनायॆं

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