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चार कविताएँ – वीनस केसरी – अंक – ४

चार कविताएँ – वीनस केसरी – अंक – ४ चार कविताएँ – वीनस केसरी – अंक – ४ चार कविताएँ – वीनस केसरी – अंक – ४ चार कविताएँ – वीनस केसरी – अंक – ४ चार कविताएँ – वीनस केसरी – अंक – ४

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पांच लघुकथा – ललित कुमार सोनी (अंक-3)

ललित कुमार मिश्रा ‘सोनी ललित’ 78ए, अजय पार्क, गली नंबर 7, नया बाजार, नजफगढ़, नयी दिल्ली 110043  ईमेल – sonylalit@gmail.com मोबाइल – 9868429241   खौफ़ सोहन आज ही छेड़छाड़ के आरोप में छ: महीने की सजा काट बाहर आया था। बाहर आते ही ज्यों ही उसने मोहन को देखा अपने रंग में आ गया। ‘‘यार आज गाय टेस्ट करने का मन कर …

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आलेख : हिंदी-ग़ज़ल की अस्मिता का प्रश्न – डॉ. गिरिराज शरण अग्रवाल (अंक – 3)

हिंदी ग़ज़ल की अस्मिता का प्रश्न। यानी हिंदी ग़ज़ल के अस्तित्व का प्रश्न। हिंदी ग़ज़ल की सत्ता का प्रश्न, उसके महत्त्व का प्रश्न। अस्मिता का अर्थ ही है वह भाव या मनोवृत्ति कि मेरी एक पृथक और विशिष्ट सत्ता है। इस प्रश्न पर मन में थोड़ा असमंजस रहा तो सोचा कि क्यों न फिर से अस्मिता के शाब्दिक अर्थों को …

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चार हजल – फ़रमूद इलाहाबादी (अंक – 3)

 फ़रमूद इलाहाबादी जन्म – १० फरवरी १९५६ शिक्षा – इंजीनिरिंग इन इलेक्ट्रानिक्स सम्प्रति दूरदर्शन केन्द्र में इंजीनियर संपर्क – ७४/१, नया पुरा, करेली, इलाहाबाद – २११०१६ मोबाइल ९४१५९६६४९७ का़ग़ज थोबड़ा पोंछ के उसने जो गिराया का़ग़ज हमने सौ बार वो आँखों से लगाया का़ग़ज’ सि़र्फ रिश्वत के न मिलने से बड़े बाबू ने यार द़फ्तर में कई रो़ज घुमाया का़ग़ज …

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सात गीत – गुलाब सिंह (अंक – 3)

५ जनवरी, १९४० को इलाहाबाद जनपद के बिगहनी गांव में जन्म हुआ। जन्मतिथि के द्वन्द्व के कारण जन्म कुण्डली से भी अपरिचित ही रह गये। नौकरी के कारण ५ जनवरी, १९४० का दिन ही सनद हो गया और वक्त पर काम आ रहा है। यहां-वहां गये लेकिन गांव के ही होकर रह गये। किसी ने ’’ग्राम्य जीवन का विशिष्ट नवगीत‘‘ …

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आठ कविताएँ – अजामिल (अंक -3)

अजामिल  मूलनाम : आर्य रत्न व्यास मोबाइल नं० : 9889722209 ब्लॉग : samkaalinmuktibodh.blogspot.com   जूते लाखोँ-करोड़ों बेमतलब की चीजों के बीच कहीं न कहीं है सब के मतलब की कोई न कोई चीज़ परम्पराओं के इतिहास में घटती-बढती रही है पैरों की नाप लेकिन जूते जहाँ थे वहीँ हैं आज भी जूते कहीं भी रहें कभी नहीं भूलते अपनी औकात को …

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कहानी : बंद कमरे का धुँआ – अर्चना ठाकुर (अंक-3)

मैं उसे जानती थी ये तो उसको देखते मेरी स्मृतियों ने तय कर लिया। पर नाम, नाम क्यों नहीं याद आ रहा। वो चेहरा जाना पहचाना तो है। उसके चेहरे के भाव भी कितने जाने पहचाने से है जैसे आज वह क्लान्त, मलिन भाव से मेडिकल कॉलेज के क्लिनिकल विभाग के एक केबिन के बाहर खड़ा था। क्यों? इसका तो …

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समीक्षा : तेरे नाम का लिये आसरा – समीक्षक : शिज्जु शकूर (अंक -3)

अनुभव एवं काव्य प्रतिभा का संग्रहणीय संकलन हमेशा से मेरा ये मानना है कि ज़िन्दगी मुसलसल हर सांस के साथ फ़ना होती है और हर सांस के साथ शुरू । किसी काम के करने का मुनासिब वक्त कौन सा है? मेरा जवाब है जब शुरू करो वही वक्त मुनासिब है। ठीक उसी प्रकार सीखने की उम्र क्या है?  बड़ा बेतुका …

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पांच कविताएँ – मनोज कुमार गुप्ता (अंक -3)

परिचय मनोज कुमार गुप्ता आत्मकथ्य = जब मैं  मात्र 9 महीने का था तभी मेरे ऊपर पोलियो नामक भयंकर बीमारी का प्रहार हुआ जिससे मेरे शरीर का 90% हिस्सा प्रभावित हुआ । मेरे जीवन की आशा नहीं थी परंतु आप जैसे सुधी जनों का साथ जीवन में था और माता पिता का प्रयास था क़ि मैं आज आप सब के …

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समीक्षा : ‘जो दिल की तमन्ना है’ – समीक्षक : प्रो0 मुकेश दुबे (अंक -3)

यूँ तो शीर्षक ही कह रहा है कि कुछ दिल ने कहा है, परन्तु दिल हमेशा कुछ कहता ही रहता है। हर धड़कन एक ख्वाहिश होती है। होना भी चाहिये, न हों आरजू तो कितनी बेमानी होगी ज़िंदगी। मगर यही हसरतें जब इंसानियत की हदों के उस पार जाने लगती हैं तब शुरू होती है समस्या। संजय अग्निहोत्री जी की कलम …

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ग़ज़ल – अब्बास क़मर (अंक-3)

अब्बास क़मर ईमेल – abbasfreelancer02@gmail.com 1. आज पाज़ेब की छनछन ने रुलाया हमको आपका इश्क ये किस मोड़ पे लाया हमको पहले उंचाइयां बख्शीं… मेरे हमदम ने मुझे और फ़िर अपनी ही नज़रों में गिराया हमको वक़्त की मार ने इस तर्ह बिगाड़ी सूरत आईना देख के पहचान न पाया हमको रौशनी जश्ने-चराग़ां में थी मसरूफ़ बहोत रास्ता आज अँधेरों …

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तीन गीत – दीपक गोस्वामी “चिराग” (अंक -3)

दीपक गोस्वामी “चिराग” शिक्षा- परास्नातक (गणित), शिक्षा-स्नातक सम्प्रति-  सहायक अध्यापक – परिषदीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय अलावलपुर, बहजोई (सम्भल) उ.प्र. सम्पर्क सूत्र – शिव बाबा सदन,  कृष्णा कुंज बहजोई,  (सम्भल) उत्तर प्रदेश ,भारत,   पिन 244410 मो -9548812618 Email: deepakchirag.goswami@gmail.com (1) हूं मैं’ जननी तेरी, हूं मैं’ धरिणी धरा दूं मैं’ भोजन वसन, रत्न सोना खरा॥ चीर लेती मैं’ छाती,क्षुदा के लिये हूं बहाती’ मैं गंगा, तृषा के …

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तुम्हारा शिष्य, हमारे पाले में आ गया है! – संस्मरण -ज़हीर कुरेशी – अंक -2

अब तो छंद-मुक्त और मुक्त-छंद कविता के सुपरिचित कवि पवन करण भी 51 वर्ष आयु की सीमा-रेखा पार कर चुके हैं। मेरे खयाल से वर्ष 1982 में पवन यही कोई अठारह साल के रहे होंगे। आकण्ठ किसी के प्यार में डूबे हुए। बाद की अपनी ”किस तरह मिलूँ तुम्हें” कविता की तरह अनेक कामनाएँ पाले हुए। 1982 में पवन करण …

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अनकहे अ़फसाने – कहानी – अंक 2

प्रतिमा त्रिपाठी गणेशपुरम, इलाहाबाद ईमेल – pratima.pra13@gmail.com   चिलचिलाती धूप में अब और चलने को जी नहीं चाहता था पर दूर तक किसी टैक्सी का निशान नहीं था, जो गुजरी भी वो या तो भरी हुई थी या रुकी नहीं। सोच ही रही थी थोड़ा और अपने को खींच सकूँ तो मेट्रो तक पहुँच सकती हूँ पर धूप राख करने …

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छ: लघुकथाएँ – ललित कुमार मिश्रा – अंक -2

ललित कुमार मिश्रा ‘सोनी ललित’ ७८ए, अजय पार्क, गली नंबर ७, नया बाजार, नजफगढ़, नयी दिल्ली ११००४३ ईमेल: sonylalit@gmail.com, मोबाइल: 9868429241   खौफ़ सोहन आज ही छेड़छाड़ के आरोप में छ: महीने की सजा काट बाहर आया था। बाहर आते ही ज्यों ही उसने मोहन को देखा अपने रंग में आ गया। ‘‘यार आज गाय टेस्ट करने का मन कर …

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समीक्षा – क्योंकि औरत कट्टर नहीं होती (समीक्षक : आरिफा एविस) अंक – 2

  ‘क्योंकि औरत कट्टर नहीं होती’ डॉ. शिखा कौशिक ‘नूतन’ द्वारा लिखा गया लघु कथा संग्रह है जिसमें स्त्री और पुरुष की गैर बराबरी के विभिन्न पहलुओं को छोटी-छोटी कहानियों के माध्यम से सशक्त रूप में उजागर किया है. इस संग्रह में हमारे समाज की सामंती सोच को बहुत ही सरल और सहज ढंग से प्रस्तुत किया है, खासकर महिला विमर्श …

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पांच ग़ज़लें (दिनेश कुमार दानिश) अंक – 2

दिनेश कुमार जन्मतिथि — 25.10.1977 जन्मस्थान — पूंडरी, जिला- कैथल। हरियाणा। स्थायी पता — नजदीक डाकघर। गाँव – पूंडरी। जिला – कैथल। हरियाणा। pin code — 136026 सम्पर्क सूत्र — dkdaanish77@gmail.com 09896755813 1 दिलों में प्यार का दरिया अगर सूखा नहीं होता तो हरगिज़ भाइयों में घर का बँटवारा नहीं होता बिना परखे हक़ीक़त का भी अंदाज़ा नहीं होता समन्दर …

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पांच ग़ज़लें – रमा वर्मा – अंक 2

  रमा वर्मा वर्तमान पता : प्लाट नंबर – १३, आशीर्वाद नगर, हुडकेश्वर रोड , नियर : रेखा नील काम्प्लेक्स , नागपुर- २४ दूरभाष नंबर : ०७१२/२७५३७१२, ७६२०७५२६०३ ई मेल : ramaverma123@gmail.com 1. कही बात से हम मुकरते नहीं हैं कभी कर्म करने से डरते नहीं हैं पड़ें स्वार्थ में और मतलब की खातिर दगा हम किसी से भी करते …

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दोहे – प्रताप नारायण सिंह – अंक – 2

प्रताप नारायण सिंह एक खंड काव्य – “सीता :एक नारी” प्रेस में है और शीघ्र प्रकाशनार्थ है। कुछ कवितायें गर्भनाल और परिंदे पत्रिका में प्रकाशित हुयी हैं।  इ पत्रिकाओं – अनुभूति, साहित्यकुंज इत्यादि में कई रचनाएँ प्रकाशित। अनुभूति और गर्भकाल में कहानियाँ भी प्रकाशित हैं। देश बना बाज़ार अब, चारों ओर दुकान राशन है मँहगा यहाँ, सस्ता है ईमान राजा- रानी …

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पाँच कविताएँ – संजीव निगम – अंक 2

संजीव निगम  कविता, कहानी, व्यंग्य लेख, नाटक आदि विधाओं में सक्रिय रूप  से  लेखन।  अनेक पत्रिकाओं-पत्रों में रचनाओं का लगातार प्रकाशन। मंचों, आकाशवाणी और दूरदर्शन से रचनाओं का नियमित प्रसारण. रचनाएं कई संकलनों में प्रकाशित हैं जैसे कि: ‘नहीं अब और नहीं’, ‘काव्यांचल’, ‘अंधेरों के खिलाफ’, ‘मुंबई के चर्चित कवि’ आदि. एक व्यंग्य संग्रह प्रकाशित। शेक्सपीयर की 7 कहानियों का अनुवाद पुस्तक रूप में प्रकाशित। कुछ …

कृष्ण सुकुमार

पाँच कविताएँ (कृष्ण सुकुमार) अंक – 2

कृष्ण सुकुमार ए०  एच०  ई०  सी०  , आई. आई. टी. रूड़की रूड़की-247667 (उत्तराखण्ड) मोबाइल नं० 9917888819 ईमेल kktyagi.1954@gmail.com (1) मिटते चले गये वे तमाम रास्ते जिनसे हो कर पहुँचा इस पानी तक! स्पर्श करूँ तो आँसू हैं! प्यास को क्या जवाब दूँ? इसमें उतर जाऊं तो उफनता दरया है! क्या जवाब दूँ कश्ती को? झाँकूं तो शांत निर्मल दर्पण है! …

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पांच ग़ज़लें (शरीफ़ अहमद  क़ादरी) अंक – 2

शरीफ़ अहमद  क़ादरी “हसरत” पता  –  कंडेल  बाज़ार  श्योपुर  (म .प्र .) संवाद  – शायरी  का शौक़  मुझे  शुरू  से रहा  लकिन सही  रहनुमाई नहीं  मिल पा रही थी फिर तकरीबन दो साल डॉ रफीक़ गिरधरपुरी की शागिर्दी में रहा| उसके बाद डॉ ज़ाकिर नश्तरी की रहनुमाई हासिल हुई इसके अलावा ओपन बुक्स ऑनलाइन मेरे लिए मशअल ए राह साबित हुई डॉ योगराज प्रभाकर …

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तीन कविताएँ – अनिल कुमार सोनी – अंक -2

अनिल कुमार सोनी anilsoni616561@gmail.com   खोज खोज में फर्क ऊपर वाले नीचे की खोज में, नीचे वाले ऊपर की खोज में, अपनी अपनी खोज में लगे रहते है, फर्क इतना है ऊपर वाले बिना पैसों के खोज लेते है। नीचे वाले साम दाम दण्ड भेद से भी नहीं खोज पाते हैं ? अब तो कुछ नया होना चाहिए अब तो …

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बालगीत – गिलहरी (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’) – अंक 2

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”  टनकपुर रोड, ग्राम-अमाऊँ, तहसील-खटीमा, जिला-ऊधमसिंहनगर, उत्तराखण्ड, (भारत) – 262308. Mobiles: 09997996437, 9456383898 बैठ मजे से मेरी छत पर, दाना-दुनका खाती हो! उछल-कूद करती रहती हो, सबके मन को भाती हो!! तुमको पास बुलाने को, मैं मूँगफली दिखलाता हूँ, कट्टो-कट्टो कहकर तुमको, जब आवाज लगाता हूँ, कुट-कुट करती हुई तभी तुम, जल्दी से आ जाती हो! उछल-कूद करती रहती हो, …

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पांच ग़ज़लें – अब्बास क़मर “फैज़ी” – अंक-2

अब्बास क़मर “फैज़ी” जौनपुर उत्तर प्रदेश के निवासी हैं| साहित्यिक जगत में दिलचस्पी तो बहोत पुरानी है पर क़लम हाल ही में उठाई है! कई ग़ज़लें कही हैं पर अभी तक प्रकाशित नहीं हुई हैं!  ग़ज़लों का मेयार क्या है आप ख़ुद देखें –  ग़ज़ल – 1 मेरी ख्वाहिश है मैं ऐसा मकान हो जाऊँ| रहूँ ज़मीं पे मगर आसमान हो जाऊँ| …

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संपादकीय – वीनस केसरी – अंक-1

आज अंजुमन ई-पत्रिका का यह पहला अंक प्रस्तुत करते हुए कई बातें मन में हैं| पिछले वर्ष अक्टूबर महीने में अंजुमन प्रकाशन की ओर से छमाही पत्रिका शुरू करने का विचार बना था और पहला अंक (जनवरी-जून-2016) प्रकाशित हुआ था| दूसरे अंक (जुलाई-दिसंबर-2016) की तैयारी भी पूरी हो चुकी है और जल्द ही छमाही पत्रिका का दूसरा अंक आपके हाथों …

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पांच ग़ज़लें – एहतराम इस्लाम – अंक-1

एहतराम इस्लाम हिन्दी और उर्दू  ज़बानों के बीच थरथराते एक ऐसे पुल का नाम है, जो बड़े स्तर पर हमारे समय और समाज को पिछले लगभग साढ़े तीन दशकों से जोड़ने का काम करता रहा है। भाषाई सौहाद्र्र, धर्म निरपेक्ष भंगिमा, हिन्दुस्तानी लबो-लहजा, निथरी हुयी पारदर्शी जीवन दृष्टि, कथ्य और शिल्प का सामन्जस्य सहेजते इस ग़ज़लकार ने समकालीन ग़ज़ल लेखन …

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पांच ग़ज़लें – सज्जन धर्मेन्द्र – अंक – 1

सज्जन धर्मेन्द्र अंतर्जाल पर ‘सज्जन’ धर्मेन्द्र एक जाना पहचाना नाम हैं। आपका पूरा नाम धर्मेन्द्र कुमार सिंह और ‘सज्जन’ उपनाम हैं। जन्म उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में 22 सितंबर, 1979 को हुआ, प्रारंभिक शिक्षा प्रतापगढ़ के राजकीय इंटर कालेज से प्राप्त करने के बाद इन्होंने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से प्रौद्योगिकी स्नातक और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की से प्रौद्योगिकी परास्नातक की उपाधियाँ …

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चार गीत – अजय कुमार सिंह – अंक-1

अजय कुमार सिंह  जन्मतिथि- 29 नवम्बर 1985  जन्मस्थान- उत्तर-प्रदेश के गाज़ीपुर जिले के एक छोटे से सीमान्त गाँव का पैत्रिक घर। माता श्रीमती उर्मिला प्रकाश सिंह और पिता श्री जय प्रकाश सिंह कालान्तर में लखनऊ में आकर बस गये। पिता लोक निर्माण विभाग में अवर-अभियन्ता के पद पर कार्यरत हैं; जिसके कारण आपको प्रारंभिक शिक्षा के दौरान कई स्कूल बदलने …

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पांच नवगीत – यश मालवीय – अंक-1

यश मालवीय जन्म : 18 जुलाई  1962  शिक्षा : इलाहबाद विश्वविद्यालय से स्नातक सम्प्रति : ए.जी. ऑफ़िस इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश में कार्यरत पिता : उमाकांत मालवीय सम्पर्क : ‘रामेश्वरम’, ए-111, मेंहदौरी कॉलोनी, इलाहाबाद 211004 मो.- (+91)9839792402 प्रकाशित कृतियां : नवगीत संग्रह – कहो सदाशिव, उड़ान से पहले, एक चिड़िया अलगनी पर एक मन में, बुद्ध मुस्कुराए, एक आग आदिम, कुछ बोलो चिड़िया, …

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हैप्पी की शादी (कहानी – सन्देश नायक) अंक-1

सन्देश नायक जन्म तिथि – 01 जुलाई,  1985 शिक्षा – स्नातक (मनोविज्ञान) रूचि – लेखन, अध्ययन, संगीत पता – अयोध्या बस्ती, लहचूरा रोड हरपालपुर, जिला-छतरपुर (म.प्र.) ई-मेल – sandesh.nayak04@gmail.com संपर्क – 8376874779 ब्लॉग – swarn-sandesh.blogspot.com   10 फरवरी को रिंका के छोटे भाई की शादी थी। जब से ये समाचार मिला पंडित जी का दिल बा़ग-बा़ग हो गया। काफी अरसे बाद अपने खास …

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पांच ग़ज़लें – राकेश कुमार “दिलबर” – अंक-1

27 जुलाई 1972 को उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर ज़िले में कादीपुर तहसील के एक गाँव विजेथुआ, राजापुर में पैदाइश। माँ बाप ने नाम राकेश दूबे रखा, इब्तदायी तालीम गाँव के स्कूल में ही हासिल की और इण्टरमीडिएट पास करने के बाद तालीम को खैरबाद कह दिया। तब तक तबीयत में सा़जो-आहंग का जादू अपना असर घोल चुका था और संगीत …

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पांच कविताएँ – रजत कुमार मिश्रा – अंक-1

मैं सर्वज्ञ क्या लिखूँ जो ना लिखा हो, क्या बताऊँ जो ना दिखा हो, सब ने तो जग छान लिया है, क्या दिखाऊँ जो ना बिका हो। सूर्य शशि दो चक्षु सम थे, रात दिन जग अवलोका, मरू छनाई, वन उधेड़ा पवन संग बन के झोंका। सागरों की तह तलाशी, पर्वत घाटियाँ तराशी, मेघों में जल कण घनाए, वायु घूर्णन …

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दुनिया के दरीचे से (नज़्म – प्रतिमा त्रिपाठी) अंक-1

प्रतिमा त्रिपाठी की ऩज्मों को पढ़ना अपने आप में एक उत्सव है। गर्दिश की स्याह सुरंगों में उम्मीदों के जुगनुओं की बरामदगी है ये ऩज्में। कहन में हवाओं का लोच, लहरों की रवानी, दरिया की जवानी और ह़जारहा पूâलों की शो़खी एक साथ ऱक्स करती सी दिखाई देती है। एक तिलिस्म तारी हो जाए दिलो-दिमाग में, एक बेकाबू बगावत के …

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फेयरनेस क्रीम (कहानी – प्रियंका ओम) अंक-1

प्रियंका ओम नाम कॉमन हो सकता है, पर कहानियाँ नहीं। सच लिखती है, बेहिचक लिखती है, बिंदास लिखती है। इनकी कहानियों में समाज का कड़ुवा सच है, तो जिंदगी की फंतासियां भी। रिश्तों की नाजुक डोर है, तो स्वार्थ की गाँठ भी। प्रियंका इंग्लिश लिट्रेचर से ग्रेजुएट हैं और हिंदी से गजब का लगाव है। जन्म जमशेदपुर में हुआ और …

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शाम – चाँद – भोर (हाइकु – मानोशी) – अंक – 1

मानोशी ड भारत – छत्तीसगढ़ के कोरबा शहर में जन्म ड बंगला भाषी परिवार में लालन-पालन होने के कारण बंगला साहित्य से गहरा लगाव किंतु हिन्दी वातावरण में रहने से हिन्दी व उर्दू के प्रति प्रेम। ड घर में साहित्य व संगीत का वातावरण होने के कारण बचपन से ही इनके प्रति गहरा लगाव। विद्यार्थी जीवन से ही मौलिक लेखन …

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तुम ज्योति शिखा पथ प्रेरक सी – (दुर्मिल सवैया – केवल प्रसाद “सत्यम”) – अंक – 1

केवल प्रसाद ‘सत्यम’ जन्म तिथि – १०.०७.१९६३ जन्म स्थान – लखनऊ, उत्तर प्रदेश पिता का नाम – स्व० राम फेर माता का नाम – स्व० राम रती शिक्षा – स्नातक पता बी-5, कौशलपुरी, खरगापुर गोमती नगर विस्तार, लखनऊ पिन-226010  मोबाइल संख्या 9415541353 लखनऊ स्थित साहित्यिक संस्थाएँ ‘चेतना साहित्य परिषद’, ‘अखिल भारतीय नवोदित साहित्कार परिषद’, ‘लक्ष्य संस्था’, ‘अखिल भारतीय अगीत परिषद’ …

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पांच ग़ज़लें – ज़हीर क़ुरेशी – अंक -1

ज़हीर कुरेशी जन्म : ५ अगस्त १९५० ई. जन्म स्थान : चन्देरी, जिला-अशोक नगर, (म.प्र.) रचनाकाल : १९६५ से अब तक … निरंतर सृजन की मूल विधा : हिन्दी ग़ज़ल प्रकाशित ग़ज़ल-संग्रह : १. लेखनी के स्वप्न (१९७५), २. एक टुकड़ा धूप (१९७९), ३. चाँदनी का दु:ख (१९८६) ४. समंदर ब्याहने आया नहीं है (१९९२), ५. भीड़ में सबसे अलग …

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पांच कविताएँ – दिलबाग सिंह विर्क – अंक-1

दिलबाग विर्क का जन्म २३ अक्तूबर १९७६ को हरियाणा के गाँव मसीतां (जिला – सिरसा) में हुआ। आपने हिंदी और इतिहास में स्नातकोत्तर की उपाधि हासिल की और हिंदी में यू.जी.सी. की राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण की। शिक्षण में आपने डिप्लोमा और डिग्री हासिल करके पहले प्राथमिक शिक्षक के रूप में कार्य किया और अब आप हिंदी के लेक्चरार पद …

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कविता क्या है? (आलेख – सौरभ पाण्डेय) अंक-1

जन्मतिथि 3 दिसम्बर 1963 जन्म स्थान देवघर, झारखण्ड कृतियाँ इकड़ियाँ जेबी से (काव्य संग्रह) परों को खोलते हुए – १ (संपादन) संपर्क, मो- 9919889911 सौरभ पाण्डेय का मूल पैत्रिक स्थान उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद का द्वाबा परिक्षेत्र है तथा परिवार विगत पच्चीस वर्षों से इलाहाबाद में है. आप उन अध्येताओं में से हैं जिनके लिए साहित्य-कर्म मात्र संप्रेषण नहीं, बल्कि …

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गरजपाल की चिट्ठी (कहानी – अनुराग शर्मा) अंक – 1

एक बेहतरीन किस्सागो, कवि और ब्लॉगर अनुराग शर्मा की कथाएँ पाठकों को अपनी अंतिम पंक्ति तक बांधे रहने में सक्षम है। उनकी कहानी पढ़ते हुए अक्सर पाठक को निजी संस्मरण की अनुभूति होती है। एक पूर्णतः अप्रत्याशित अंत उनके कथालेखन की विशेषता है। ‘बांधों को तोड़ दो’, ‘वैरागी मन’, ‘प्रवासी मन’, एन एलियन अमंग फ्लेशईटर्स व सीक्रेट डायरी ऑफ एन …