tere nam ka leke aasara

समीक्षा : तेरे नाम का लिये आसरा – समीक्षक : शिज्जु शकूर (अंक -3)

अनुभव एवं काव्य प्रतिभा का संग्रहणीय संकलन हमेशा से मेरा ये मानना है कि ज़िन्दगी मुसलसल हर सांस के साथ फ़ना होती है और हर सांस के साथ शुरू । किसी काम के करने का मुनासिब वक्त कौन सा है? मेरा जवाब है जब शुरू करो वही वक्त मुनासिब है। ठीक उसी प्रकार सीखने की उम्र क्या है?  बड़ा बेतुका …

jo dil ki tamanna hai

समीक्षा : ‘जो दिल की तमन्ना है’ – समीक्षक : प्रो0 मुकेश दुबे (अंक -3)

यूँ तो शीर्षक ही कह रहा है कि कुछ दिल ने कहा है, परन्तु दिल हमेशा कुछ कहता ही रहता है। हर धड़कन एक ख्वाहिश होती है। होना भी चाहिये, न हों आरजू तो कितनी बेमानी होगी ज़िंदगी। मगर यही हसरतें जब इंसानियत की हदों के उस पार जाने लगती हैं तब शुरू होती है समस्या। संजय अग्निहोत्री जी की कलम …

kyoki aurat kattar nahi hoti

समीक्षा – क्योंकि औरत कट्टर नहीं होती (समीक्षक : आरिफा एविस) अंक – 2

  ‘क्योंकि औरत कट्टर नहीं होती’ डॉ. शिखा कौशिक ‘नूतन’ द्वारा लिखा गया लघु कथा संग्रह है जिसमें स्त्री और पुरुष की गैर बराबरी के विभिन्न पहलुओं को छोटी-छोटी कहानियों के माध्यम से सशक्त रूप में उजागर किया है. इस संग्रह में हमारे समाज की सामंती सोच को बहुत ही सरल और सहज ढंग से प्रस्तुत किया है, खासकर महिला विमर्श …