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तुम्हारा शिष्य, हमारे पाले में आ गया है! – संस्मरण -ज़हीर कुरेशी – अंक -2

अब तो छंद-मुक्त और मुक्त-छंद कविता के सुपरिचित कवि पवन करण भी 51 वर्ष आयु की सीमा-रेखा पार कर चुके हैं। मेरे खयाल से वर्ष 1982 में पवन यही कोई अठारह साल के रहे होंगे। आकण्ठ किसी के प्यार में डूबे हुए। बाद की अपनी ”किस तरह मिलूँ तुम्हें” कविता की तरह अनेक कामनाएँ पाले हुए। 1982 में पवन करण …