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आठ कविताएँ – अजामिल (अंक -3)

अजामिल  मूलनाम : आर्य रत्न व्यास मोबाइल नं० : 9889722209 ब्लॉग : samkaalinmuktibodh.blogspot.com   जूते लाखोँ-करोड़ों बेमतलब की चीजों के बीच कहीं न कहीं है सब के मतलब की कोई न कोई चीज़ परम्पराओं के इतिहास में घटती-बढती रही है पैरों की नाप लेकिन जूते जहाँ थे वहीँ हैं आज भी जूते कहीं भी रहें कभी नहीं भूलते अपनी औकात को …

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पांच कविताएँ – मनोज कुमार गुप्ता (अंक -3)

परिचय मनोज कुमार गुप्ता आत्मकथ्य = जब मैं  मात्र 9 महीने का था तभी मेरे ऊपर पोलियो नामक भयंकर बीमारी का प्रहार हुआ जिससे मेरे शरीर का 90% हिस्सा प्रभावित हुआ । मेरे जीवन की आशा नहीं थी परंतु आप जैसे सुधी जनों का साथ जीवन में था और माता पिता का प्रयास था क़ि मैं आज आप सब के …

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पाँच कविताएँ – संजीव निगम – अंक 2

संजीव निगम  कविता, कहानी, व्यंग्य लेख, नाटक आदि विधाओं में सक्रिय रूप  से  लेखन।  अनेक पत्रिकाओं-पत्रों में रचनाओं का लगातार प्रकाशन। मंचों, आकाशवाणी और दूरदर्शन से रचनाओं का नियमित प्रसारण. रचनाएं कई संकलनों में प्रकाशित हैं जैसे कि: ‘नहीं अब और नहीं’, ‘काव्यांचल’, ‘अंधेरों के खिलाफ’, ‘मुंबई के चर्चित कवि’ आदि. एक व्यंग्य संग्रह प्रकाशित। शेक्सपीयर की 7 कहानियों का अनुवाद पुस्तक रूप में प्रकाशित। कुछ …

कृष्ण सुकुमार

पाँच कविताएँ (कृष्ण सुकुमार) अंक – 2

कृष्ण सुकुमार ए०  एच०  ई०  सी०  , आई. आई. टी. रूड़की रूड़की-247667 (उत्तराखण्ड) मोबाइल नं० 9917888819 ईमेल kktyagi.1954@gmail.com (1) मिटते चले गये वे तमाम रास्ते जिनसे हो कर पहुँचा इस पानी तक! स्पर्श करूँ तो आँसू हैं! प्यास को क्या जवाब दूँ? इसमें उतर जाऊं तो उफनता दरया है! क्या जवाब दूँ कश्ती को? झाँकूं तो शांत निर्मल दर्पण है! …

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तीन कविताएँ – अनिल कुमार सोनी – अंक -2

अनिल कुमार सोनी anilsoni616561@gmail.com   खोज खोज में फर्क ऊपर वाले नीचे की खोज में, नीचे वाले ऊपर की खोज में, अपनी अपनी खोज में लगे रहते है, फर्क इतना है ऊपर वाले बिना पैसों के खोज लेते है। नीचे वाले साम दाम दण्ड भेद से भी नहीं खोज पाते हैं ? अब तो कुछ नया होना चाहिए अब तो …

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पांच कविताएँ – रजत कुमार मिश्रा – अंक-1

मैं सर्वज्ञ क्या लिखूँ जो ना लिखा हो, क्या बताऊँ जो ना दिखा हो, सब ने तो जग छान लिया है, क्या दिखाऊँ जो ना बिका हो। सूर्य शशि दो चक्षु सम थे, रात दिन जग अवलोका, मरू छनाई, वन उधेड़ा पवन संग बन के झोंका। सागरों की तह तलाशी, पर्वत घाटियाँ तराशी, मेघों में जल कण घनाए, वायु घूर्णन …

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पांच कविताएँ – दिलबाग सिंह विर्क – अंक-1

दिलबाग विर्क का जन्म २३ अक्तूबर १९७६ को हरियाणा के गाँव मसीतां (जिला – सिरसा) में हुआ। आपने हिंदी और इतिहास में स्नातकोत्तर की उपाधि हासिल की और हिंदी में यू.जी.सी. की राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण की। शिक्षण में आपने डिप्लोमा और डिग्री हासिल करके पहले प्राथमिक शिक्षक के रूप में कार्य किया और अब आप हिंदी के लेक्चरार पद …